शुक्रवार, 3 अप्रैल 2009
ब्लैकमेलिंग का अच्छा साधन हैं पोर्टल
कम्प्यूटर की बदौलत अब शातिर लोगों द्वारा हिन्दी पोर्टल बनाकर शातिर लोगों को डराने-धमकाने का अच्छा साधन मिल गया है। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि इसमें पहचान कर पाना मुष्किल होता है कि धमकाने वाला कौन है और साथ ही यह भी कि न जाने उसके पास कौन-कौन से ऐसे दस्तावेज हों जो व्यक्ति-विशेष का अहित कर सकते हों। मुझे याद है कुछ दिनों पहले एक हिन्दी पोर्टल के एक संपादक ने मेरे एक परिचित को यह विष्वास दिलाया कि उनकी संस्था द्वारा उनके साथ किए गए दुव्र्यवहार में उनका पोर्टल पूरा साथ देगा। इन महोदय से पूरी जानकारी लेकर इस पोर्टल के कर्ताधर्ताओं ने उस शख्स की संस्था में संपर्क किया और उनको जानकारी दी कि अब यह सामग्री उनके पोर्टल पर आने को तैयार है। दोनों में सौदेबाजी हुई और उक्त पीड़ित व्यक्ति की सारी कहानी धरी की धरी रह गई। ऐसे अनेक वाकिये इन पोर्टल द्वारा रोज अंजाम दिए जा रहे हैं।
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